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Minal Aggarwal

Inspirational

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Minal Aggarwal

Inspirational

पुरुष सूरज है तो स्त्री एक आसमान में चमकता चांद

पुरुष सूरज है तो स्त्री एक आसमान में चमकता चांद

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पुरुष 

एक इंसान है 

जैसे कि एक नारी भी 

स्त्री और पुरुष में 

कोई भेद नहीं होना चाहिए 

दोनों एक समान हैं 

दोनों का एक शरीर है 

उसमें एक दिल धड़कता है 

देह में एक आत्मा का वास है 

दोनों का एक चेहरा है 

दो आंखें हैं 

दो कान हैं 

एक नाक है 

दो हाथ हैं 

दो पांव हैं 

दोनों का मुंह एक है 

उससे निकलती वाणी का 

स्वरूप एक है 

अंतर क्या है 

कहीं अंतर है 

दोनों के बीच तो 

समाज की संकीर्ण सोच का 

किसी पुरुष में 

स्त्री के बहुत से गुण या

अवगुण विद्यमान हो सकते हैं 

ठीक इसी प्रकार 

किसी औरत में आदमी के 

दोनों के बीच 

समानता या असमानता आ 

सकती है 

उनके सोचने के तरीके से 

उनके विचार सकारात्मक हैं या 

नकारात्मक 

विस्तृत हैं या 

संक्षिप्त

असीमित हैं या 

सीमित 

प्रगतिशील हैं या 

अप्रगतिशील हैं 

लाभकारी हैं या 

घातक 

सुखदायी हैं या 

दुखदायी 

उनकी सोच का दायरा 

उनको एक बेहतर या 

नागवार इंसान बना सकता है 

स्त्री या पुरुष 

होने से कोई फर्क नहीं पड़ता 

कोई अपराध गर घटित होता है तो 

दोनों में कोई अंतर नहीं करता 

यह किसी के साथ भी हो सकता है 

यहां तक की किसी बच्चे या 

पशु के साथ भी 

पुरुष शारीरिक रूप से 

अधिक शक्तिशाली है 

स्त्री मानसिक रूप से 

कुछ हद तक यह ठीक हो 

सकता है लेकिन 

नियमित अभ्यास से 

दोनों ही शारीरिक, 

मानसिक, भावनात्मक बल को 

बढ़ा सकते हैं 

समाज को आज के संदर्भ में 

चाहिए कि वह 

स्त्री शिक्षा को बढ़ावा दे 

एक स्त्री को भी पुरुष के 

समान बराबरी का दर्जा दे 

किसी स्त्री को तुच्छ न 

समझे 

उसे उन्नति के अवसर दे 

पुरुष समाज उनका सहयोग करें 

दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चलें 

समाज की तस्वीर को 

दोनों मिलकर बदलें और 

बेहतर बनायें 

पुरुष सूरज है तो 

स्त्री एक आसमान में 

चमकता चांद 

दोनों एक दूसरे के पूरक हैं 

दोनों की आपस में कोई 

प्रतिस्पर्धा नहीं 

पुरुष का कर्तव्य है कि 

नारी को हर क्षेत्र में आगे 

बढ़ाकर अपने पुरुषत्व को 

इस तरह के अपने योगदान से 

साबित करें।


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