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RAKESH GOYAL

Abstract

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RAKESH GOYAL

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प्रकृति का पहरेदार

प्रकृति का पहरेदार

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बना दिया कोरोना पहरेदार

खुद लगी करने अपना श्रंगार,

सदियों से ना समझा इंसान

भूल गया अपना भगवान,

काटे पेड़ सूखे तालाब

उड़ा -उड़ा धुआं बेमिसाल

कर दिया जब हाल बेहाल

ठानी अपना करने को श्रंगार,

बना दिया कोरोना पहरेदार।

सदियों के बाद तारे टिमटिमाते नजर आए

गंगा यमुना में चेहरा निहारा निहारते आए

दिन में भी चंद्रमा अपना दीदार कराए

वाह प्रकृति! वाह प्रकृति !

तेरा यह रूप क्यों ना सबको भाये

बना कोरोना पहरेदार

करने को संपूर्ण श्रंगार

करने को संपूर्ण श्रंगार

प्रकृति ने बना दिया कोरोना पहरेदार ।


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