STORYMIRROR

Mamta Rani

Classics

4  

Mamta Rani

Classics

प्रीत के रंग

प्रीत के रंग

1 min
329

होली का त्यौहार है प्रीत के रंग

खुशियाँ है अनंत अपनों के संग


आयी होलिका प्रह्लाद को जलाने

लिटायी अग्नि में गोदी में बिठाके


सुमिरन करके प्रह्लाद लेके विष्णु का नाम

भष्म हो गयी होलिका, बच गया प्रह्लाद


वरदान का किया जो उसने दुरुपयोग

खुद ही जल गई,किया जो उसने गलत उपयोग


इसी से नाम पड़ा ये, होली का त्यौहार

जो करता है बुराई पर अच्छाई का वार


होली का त्यौहार है प्रीत के रंग

खुशियाँ है अनंत अपनों के संग


रंग गुलाल अबीर डालते

प्रेम भाव से गले लगाते


बैर भावना छोड़ के अपनी

मिलजुलकर गीत हैं गाते


बृज की होली मथुरा की होली

वृन्दावन में राधा-कृष्ण की जोड़ी


बड़ा ही पवित्र और पावन होली का मौसम

मिटा देते गिले-शिकवे हो जो एक दूजे के संग


बुराई पर अच्छाई का वार है

यही होली का त्यौहार है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics