STORYMIRROR

Ruchika Rai

Abstract

4  

Ruchika Rai

Abstract

प्रेम

प्रेम

1 min
250

मेरे वीराने जीवन में रौनक बनकर है आया

मेरी चाहत को है उसने अपने प्यार से बुझाया

जानती हूँ कि बस वो कल्पना में ही है मेरे

फिर भी एक सुकून सा दिल को है पहुँचाया।


नही आस की मिलूंगी कभी उससे किसी दिन,

पर मिलती हूँ ख्वाबों में हर घड़ी हर दिन,

दर्द में होती हूँ तो उसकी कल्पना में रोती,

खुशी में होती तो संग में नाचती गाती।


पता नही क्योंकर लगता ये मेरी दीवानगी है,

मेरी ये बेपनाह मुहब्बत बस मेरी ही बानगी है,

फिर भी एक आस मन में है जगी रहती,

मेरी तरह शायद उसको भी मुझसे मुहब्बत की रवानगी है।


जो भी है न कोई शिकवा न कोई शिकायत है,

मुझे तो बस शिद्दत से उससे मुहब्बत है,

सुकून है मेरे इस दिल को बस इस बात का,

खुदा ने बख्शी ये मुझको बड़ी नेमत है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract