प्रेम
प्रेम
सजीव
में
निर्जीव
में
धूप
में
छांव
में
रात
में
दिन
में
सुबह
में
शाम
में
नफरत
में
प्रेम
में
हर
जगह
है
मौजूद
प्रेम
प्रेम
सर्वव्यापी
है
प्रेम
स्वयंभू
है
प्रेम
जहां
के
हर
कोने
में
मौजूद
है
प्रेम।
सजीव
में
निर्जीव
में
धूप
में
छांव
में
रात
में
दिन
में
सुबह
में
शाम
में
नफरत
में
प्रेम
में
हर
जगह
है
मौजूद
प्रेम
प्रेम
सर्वव्यापी
है
प्रेम
स्वयंभू
है
प्रेम
जहां
के
हर
कोने
में
मौजूद
है
प्रेम।