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Shubham Garg

Romance

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Shubham Garg

Romance

प्रेम

प्रेम

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समय मिले तो आकर मिलना

लाइब्रेरी की टेबल पर,

कुछ न बोलेंगें हम ज़ुबान से

और अटकेंगे किताबों पर,

पलटेंगे पेजों को यूँ हीं

लफ्ज़ सुनेंगें हज़ारों पर,

लिखे हुए लैटर का क्या करना?

जज़्बात पढ़ेंगे आँखों पर,

दांतों तले कभी होंठ दबाते

मुस्कान छुपायेंगे होंठों पर,

समय मिले तो आकर मिलना,

लाइब्रेरी की टेबल पर।


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