प्रेम और नफरत
प्रेम और नफरत
प्रेम में लोग
झूठ बोलते है
आधा अधूरा झूठ
सच बोलते हैं
आधा अधूरा सच
वही प्रेम
सच्चा प्रेम होता है
पारदर्शिता और
ईमानदारी के गर्भ से
समर्पण पैदा होता है
प्रेम नहीं
नफरत में
सच बोलते है
अत्यधिक सच
बिन सिर-पैर का
सच
वैसा सच
जिसका बुनियाद
झूठ पर टिका हैं।
