STORYMIRROR

Anita Mishra

Inspirational

2  

Anita Mishra

Inspirational

परछाई

परछाई

1 min
162

हर बार छल किया तुमने,

अब नहीं छलने वाली हूँ।

छोड़ चली हूँ अतीत की परछाई को,

सपनों के आकाश में उड़ने वाली हूँ।


बहुत तरसा है अपने ही चीजों के लिए,

अब अपने अधिकार के लिए लड़ने वाली हूँ।

सड़ी-गली परम्पराओं को तोड़ के,

एक नया रंग जीवन में भरने वाली हूँ।


ठान लिया है मैंने हर बाधा पार करके,

नित नयी-नयी मंजिल गढ़ने वाली हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational