प्राण लूँ
प्राण लूँ
कुछ नया न हो जब
खुद को मरा मान लूँ?
या लड़ूँ कुछ नए को
मन में ये ठान लूँ।
अधरों से सिसकियाँ फूटे
चाहे अब दिल टूटे
गुढ़ क्या है रहस्य?
आगे बढ़ जान लूँ।
मुरझाये फूलों से सीखूं
कैसे मैं हँसूँ निरखूँ?
खुद के खंजर से ही
क्या खुद के प्राण लूँ?
खोई ख़ुशी पाने को
लक्ष्य तक जाने को
छीन कर लिवास को
क्या नया पहचान लूँ?
चहुंओर हो हँसी ठिठोली
रंगों में घुली हो होली
रक्त से ये शास्त्र से
कैसे वो सम्मान लूँ ??
