पल और कर्म
पल और कर्म
पल पल करके गुज़र जाती है ज़िन्दगी
रेत फिसल जाती है जैसे हाथों से
बदल जाती है दुनिया पल में
बदल जाता है जीवन पल में
सद्विचार कराता अच्छे करम, पल में
कुविचार कराता बुरे करम, पल में
जैसा विचार आये जिस पल में
वैसे ही हों हमारे करम
जिस पल आये अधम खयाल
बन जाता है , स्वर्ग नरक
जिस पल आये निर्मल खयाल
बन जाता है , नरक स्वर्ग
इक पल बनाता है मानव
इक पल बनाता है दानव
बदल जाता है नज़ारा पल में
बने राजा से रंक, रंक से राजा पल में
कुछ करने से पहले विचार लें
हर पल को सँवार लें।
बीता लम्हा बन जाता है याद
लम्हा लम्हा जीना और खुश रहना
जाते हुए पल, हर छूटती सांस
कैसे भी हो पल, गुज़र जाते हैं
कर्म बनाते हैं, और सबक सिखाते हैं
बलवान और ताकतवर है हर पल
न गवाएँ इन पलों को
भरपूर जीएं हम हर पल को।
पल पल करके जीवन गुज़र गया
पहुँच गये हम मृत्यु के पल में
सोचा, ये कैसा पल
क्या होगा इस पल के बाद
क्या किये थे कर्म हमने
क्या पूरे किये फर्ज़ हमने
जान लें हम यह सच
खुश रहें हम हर पल
ईवर को न भूलें कभी
जीवन ध्येय को न भूलें कभी
जीवन का सम्मान करें
जीवन का सम्मान करें।
