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Richa Pathak Pant

Abstract

5.0  

Richa Pathak Pant

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फिर वसंत आया

फिर वसंत आया

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हर्षोल्लास है सर्वत्र छाया,

नहीं दिखता कोई फूल कुम्हलाया।

बीता मौसम पतझड़ का,

आओ री सखी री,

फिर वसंत आया।


झूम उठे प्रेमी हृदय,

आँखों में मधुमास का सरमाया।

बीता मौसम विरह का,

आओ री सखी री,

फिर वसंत आया।


खिले गेंदें, चम्पा औ गुलदाऊदी

और सरसों भी इठलाया।

बीता मौसम सुप्त प्रकृति का,

आओ री सखी री,

फिर वसंत आया।


बिखरे रंग इंद्रधनुष से चहुँओर,

चितेरा भी खुद पर इतराया।

बीता मौसम बेरंगी का,

आओ री सखी री,

फिर वसंत आया।


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