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Abhishek Singh

Abstract

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Abhishek Singh

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फिर से रंग दे

फिर से रंग दे

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ख़ुशबू है गुलाल है,

मन मस्त रंगों का ख्याल है।

इस होली पे आ जाओ,

संग तेरे रंगने का ख्याल है।


खुशियों का रंग होगा,

अपनों का संग होगा।

गुजिया के मिठास से,

हर मन प्रसन्न होगा।


मथुरा हो या गोकुल हो,

चाहे बरसाना की गलियाँ हो।

हर तरफ़ बस उमंग हो,

जब राधा कृष्णा का संग हो।


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