फेरे में मत आना मतदाता
फेरे में मत आना मतदाता
फ्री फ्री की फेहरिस्त से,
भरे पड़े हैं यूपी के अखबार।
फ्री में फ्री की घोषणा कर,
हर दल लेना चाहता बाजी मार।
हर दल लेना चाहता बाजी मार,
पर फेरे में मत आना मतदाता।
अगर आ गये इनके फेरे में,
तो होगा अंध भविष्य से नाता।
अब झांसे रामों के झांसों पर,
मत करना मतदाता तुम विश्वास।
नहीं पांच साल के अंतराल में,
फ्री की आश में टूट जायेगी सांस।।
जब आयेगी फ्री देने की बारी,
तब सत्ता लगायेगी इतने कानून।
लेने वाला खुद भूल जायेगा,
फ्री की योजना का मजमून।
फ्री की योजना का मजमून,
खून उसका हो जायेगा पानी।
सौ में दो को मिलेगा केवल,
तब पता चलेगी फ्री की कहानी।
नेता समझ कबूतर जनता को,
डाल रहे फ्री का फ्री में जाल।
बिन समझे चुगने मत आ जाना,
'हरी' समझकर फ्री का माल।।
