STORYMIRROR

Shelly Jain

Inspirational

5.0  

Shelly Jain

Inspirational

पहचान

पहचान

1 min
454


हे अनिमेष प्रभु

तुमसे पहचान नहीं हो पाती

सांसों के तारों को कर गुम्फित

अहम भाव से बाहर नहीं आ पाती

स्वंय में स्व को बांधकर

स्वंय को खोज नहीं पाती

कर्मों के इस घेरे में


भवसागर में मेरी नाव

पार नहीं पाती

पंचतत्वों की देह मेरी

इसका मोह नहीं छोड़ पाती

तरूवर की शाख से पहचान कब होगी

हे प्रभु

जाने क्यों तुमसे पहचान नहीं हो पाती


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational