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Neerja Sharma

Abstract

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Neerja Sharma

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पैसा

पैसा

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पैसे की कहानी

पैसा ही जाने 

इंसान का दिल

हो जाता बेमानी 

ऊँच-नीच सब भुला 

भरी भीड़ में रहे अकेला।


मकसद केवल पैसा बढ़ाना

तरीके का न कोई पैमाना

सीधे हाथ न जब चला काम

अंगुली टेढ़ी कर पैसा कमाना।


परिणाम

सब जाने इसका अंजाम

पाप का गहरा कुआँ  

जिसमें गिर काम तमाम,


इन्कमटैक्स की रैड का डर

न नींद न चैन जीवन भर,

फिर न कोई देता साथ 

रोता क्यों सिर रख कर हाथ।


समय रहे गर संभल जाता 

तो जीवन सफल हो जाता 

अपने दंभ में जिनको छोड़ा

 साथ उन्हें ही खड़ा पाता।


पैसा जरूरी है जीने के लिए

अपनों को पाने के लिए

इज्जत की दो वक्त रोटी के लिए

समाज में सम्मान पाने के लिए

चैन की नींद सो जाने के लिए।


जो भागते पैसे के पीछे

जिंदगी नर्क उनकी बन जाती

सुख के स्वप्न चूर हो जाते

सुकून जीवन न कहीं वे पाते।


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