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Nisha Nandini Bhartiya

Abstract


5.0  

Nisha Nandini Bhartiya

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पानी और धूप

पानी और धूप

1 min 303 1 min 303


बादल सच बतलाना

तुम ऐसा कैसे कर लेते हो

मूसलाधार रोते हो

और सफेद चमकीला हँसते हो

एक दिन तुम्हें देख

मैंने भी कोशिश की थी

पर मेरे मुस्कुराने का

झूठ पकड़ा गया


और मैं -

अधिक फूट फूट कर रो पड़ी

पर तुम्हारी सुनहरी

मुस्कुराहट ने तो

तुम्हारा रोना ही  

बंद कर दिया

खिली खिली धूप निकल आई

तुरंत ले गई उड़ा कर

तुम्हारे रोने को

बस मैं तुम्हें

एकटक देखती ही रह गई।



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