ऑनलाइन प्यार का चमत्कार
ऑनलाइन प्यार का चमत्कार
है यह कहानी बड़ी मजेदार।
एक युगल था बड़ा जोरदार।
जीवन के मध्य में दोनों का एक दूसरे से मन उठ गया था।
दोनों का मन कुछ नया करना चाह रहा था।
तभी आया ऑनलाइन का जमाना।
उनके हाथ में लगा एक खजाना।
दोनों ने फेक आईडी से अपने अपने अकाउंट फेसबुक पर खोलें।
बहुत सुंदर-सुंदर फोटो लगाई।
एक दूसरे को कुछ बात ना बताई।
लगे दोनों फेसबुक पर दोस्तों की खोज करने।
जोगानुजोग दोनों को आपस में ही अच्छी दोस्ती नजर आई।
दोनों एक दूसरे से अनजान फेसबुक के अच्छे दोस्त बन गए।
एक दूसरे की दोस्ती में दोनों खो गए।
दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।
अब दोनों में ही सबर नहीं था, एक दूसरे से मिलने और देखने का।
कोई प्रेम में पड़े पंखिड़ों के जैसे दोनों छटपटा रहे थे।
आपस में मिलने का बहाना ढूंढ रहे थे।
आखिर में दोनों ने एक दूसरे को एक बगीचे में मिलने का प्लान बनाया।
कैसे कपड़े पहन कर आएंगे। जिससे पहचान पाएंगे,
वह भी उन्होंने तय कर लिया,
दोनों नियत समय पर बगीचे में पहुंच गए।
एक दूसरे को जैसे बताए थे वैसे कपड़े पहने देखा,
दोनों पहले तो हक्के-बक्के रह गए।
फिर जोर-जोर से हंसने लगे हम नए साथी ढूंढने गए थे, नया प्यार ढूंढने गए थे।
पुराने प्यार में ही हमको नया प्यार मिल गया, यह बात बोल सब भूल जोर-जोर से हंसने लगे।
अपने प्यार के ऊपर लगी धूल को हटाकर, वापस नये प्यार में खो गए।
दोनों इन कसमे वादों के साथ, अब एक दूसरे को कोई धोखा नहीं देंगे, एक दूसरे के साथ प्रेम से रहेंगे।
मेरी दौड़ तुम्हारे तक है। तुम्हारी दौड़ मेरे तक बोल हाथ में हाथ डाले घर की और चल दिए
"मियां की दौड़ मस्जिद", तक इस कहावत को सफल कर दिए।

