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Suraj Singh Sarki

Abstract Romance Others

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Suraj Singh Sarki

Abstract Romance Others

निर्लिप्त नहीं है

निर्लिप्त नहीं है

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जानता हूँ मैं

तुम हो साथ जब तक

तो अच्छाई है साथ मेरे..

अच्छे लोग बुरे नहीं होते

न बुरा होने देते है...

अच्छे लोग तुम जैसे होते है

या होते है बिल्कुल तुम्हारी तरह...

इसलिए आ ही जाते है

मीठे ख्याल लिए और बिछ जाते है

कदमों पर तुम्हारे....

सुन रही हो न 

सच्ची हो तुम और सचमुच में 

सच्चे सपने लिए

चली आती हो चिड़िया सी

फुदकते हुए -चहचहाते हुए

और बुन देती हो मेरे जीवन के 

ढहते घोंसले को...

जानता हूँ तुम मेरी नहीं हो

फिर भी रहती हो दिल में 

बसी हो दिमाग में....

देखो न अनचाहे ही करने लगा हूँ प्रेम

अनचाहे ही निभाने लगा हूँ अनचाहा रिश्ता

जो मेरे प्रेम सा है निराकार

मगर निर्लिप्त नहीं है

मगर निर्लिप्त नहीं है



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