STORYMIRROR

Ragini Singh

Romance

1  

Ragini Singh

Romance

" नीलाम हो गए | "

" नीलाम हो गए | "

1 min
377

यूं तो शोहरत थी खास थे हम 

मगर तुम्हारी खातिर हम आम हो गए।


कभी उगता सूरज हुआ करते थे 

तुम्हारे खातिर ढलती शाम हो गए।


सब तुम्हारी खातिर था मगर 

जब तुमने हमारी कीमत पूछ ली

हम किसी और को नीलाम हो गए।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance