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Hardik Mahajan Hardik

Abstract

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Hardik Mahajan Hardik

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निगाहें

निगाहें

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निगाहों ने निगाहों को घेरा हैं

जिंदगी से बेपनाह हुआ हैं


सुकून ही सुकून मिलेगा 


यहाँ ज़रा सम्भल ज़िन्दगी 

में बस तू दो पल के लिए।


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