निडर बन,चलता चल
निडर बन,चलता चल
तू चलता चल अब यूं ही लहरा कर,
जीवन से कभी मत बैठ हारकर !
सरिता की तरह आगे बहता चल,
निडर बन और आगे बढ़ता चल !
देवों के जैसा होता सुंदर स्वरूप,
उस पर इस बात को दो वृहद रूप!
इस गुण को मन में बाँध निखरकर,
जीवन होता ऐसा बन जा अब निडर!
मत डर दुखों से और आपदाओं से,
सूरज से सदा प्रफुल्लित होते रहना!
न रुक जा डरकर इन विषमताओं से,
सुरक्षा का कवच पहन निर्बाध हंसकर!
