नेत्र उसके कह रहे हैं इक कहानी
नेत्र उसके कह रहे हैं इक कहानी
नेत्र उसके कह रहे हैं इक कहानी।
बात उसकी लग रही है हर सुहानी।।
जो छुपाई थी हृदय में बात कब से।
आज वो ही पड़ गई उसको बतानी।।
रात तक देखूंँ उसे मैं याद करके।
प्रियतमा जो दे गई थी इक निशानी।।
नित्य हम मिलते सदा थे लग गले से।
बात अब वो हो गई है इक पुरानी।।
बीत जो अब तक गई अच्छी बुरी सब।
आज मिलकर सब उसी को है सुनानी।।
पीर बिछुड़न की दबी जो इस हृदय में।
वह प्रिया को पड़ गई पीड़ा दिखानी।।

