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Paramjeet Singh Kehloori

Inspirational

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Paramjeet Singh Kehloori

Inspirational

हृदय पट खोलती हिंदी

हृदय पट खोलती हिंदी

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सुरीले बोल हिंदी के मधुर रस घोलती हिंदी।

सुना कर प्रीत की बातें हृदय पट खोलती हिंदी।।


लिखे स्वर छंदमय होकर विधा पर लेखनी दौड़े।

सुरों में लिख नई कविता नवल रस बोलती हिंदी।।


न बोले क्रोध की भाषा नहीं आघात पहुंँचाए।

निकलते ही अधर से फिर स्वयं को तोलती हिंदी।।


हुआ है जन्म संस्कृत से यही जननी कहाती है।

नए नित शोध आधारित डगर पर दौड़ती हिंदी।।


ठिठोली लेखनी करती अमाने शब्द लिख लिख कर।

अहिंदी शब्द खिचड़ी से इन्हीं से डोलती हिंदी।।


टिके भाषा न कोई भी नहीं प्रतियोगिता इससे।

निडर होकर खड़ी रण में सदा रिपु रोलती हिंदी।।


नमन करता सदा कोविद यही है हिंद की भाषा।

विधाएंँ लिख नवेली नित दिलों को जोड़ती हिंदी।।


 


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