शूरवीर महाराणा प्रताप
शूरवीर महाराणा प्रताप
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राणा प्रताप जैसा व्यवहार कर समर्पित।
लाचार पर दया से कर प्रेम पुष्प अर्पित।।
लोहा शरीर कर ले टकरा सके न कोई।
कोमल हृदय जगा कर हो स्नेह मान अर्जित।।
हिय पत्थरों सरीखा सौगंद आज लेकर।
यूँ बाँट दे स्वयं को होंगे त्रिदेव हर्षित।।
सम्मान कर सुता का हथियार बंद होजा।
ये गर्व सिर उठाता नस नस करे सुवासित।।
होके दयालु रख तू भगवान पर भरोसा।
भरले मिठास अंतस कर सर्व कार्य परहित।।
कर राष्ट्र की मृदा पर सर्वस्व त्याग ऐसे।
हो देश की मही का हर नौजवान गर्वित।।
हों भारतीय सारे राणा प्रताप जैसे।
पापी तने सिरों से होगा अहं विसर्जित।।
कहलूर के निवासी लिख गीतिका नवेली।
फिर राम राज्य से ही होगा समाज पुलकित।
