नारी
नारी
आधी शक्ति सृष्टि की नारी
आधी शक्ति देवों कि नारी
नारी नहीं बेचारी नारी आदि
अनंत युग सृष्टि अधारी।।
नारी बिन सृष्टि नहीं, नारी विहीन
ना देव, नारी से दुनिया सारी, सारी
दुनिया में नारी शक्ति भारी।।
नारी अबला नहीं अस्तित्व,
प्रतिष्ठा, भाग्य, सौभाग्य, शीतल,
ज्वाला, अंगारी।।
सम्भव, असंभव, सामंजस्य,
संशय, समन्वय अविनि आकाश
ममता का आँचल प्यार दुलार नारी
रिश्तों का संस्कार।।
पुरुषार्थ पराक्रम उत्थान पतन
उत्कर्ष निष्कर्ष आगमन अवतार नारी।।
नारी का सम्मान जहां सुख शांति
सम्पत्ति की लक्ष्मी अपमान तिरस्कार की दुर्गा काली नारी।।
मर्यादा मर्म नैतिकता धर्म कर्म मर्म महत्व की गरिमा महिमा नारी ।।
माँ प्रथम नारी पहचान
दूजी बहना रिश्ते भावों कि
स्वाभिमान अभिमान तीजा
बेटी कन्या सामाजिक रिश्तों की
सेतु नारी निर्माण।।
प्रेम श्रृंगार की प्रभा प्रवाह
प्रेयसी पत्नी जीवन की बाला
हाला मधुशाला हस्ती मस्ती की
नारी सार सारांश।।
नारी शिक्षित सशक्त सक्षम
समाज राष्ट्र बढ़ती बेटी पढ़ती
बेटी वर्तमान आशा विश्वास कि
नारी भविष्य राष्ट्र समाज कि
नींव सम्भ्रांत।।
