नारी सम्मान
नारी सम्मान
कहते हो शिकवा कोई नहीं
फिर नाराज क्यों हो गए हमसफ़र ,
हमें छोड़कर यूँ मझधार में
तुमने दावतें तो बहुत ही उड़ाई थी ,
उम्र भर साथ निभाने के लिए
कसमें भी तुमने साथ हमारे खाई थी I
उन सभी कसमों को क्यों तुम भूल बैठे हो
क्या खता हुई हमसे ,
स्त्री का धर्म याद दिलाते हो
अपना धर्म जाने क्यों भूल जाते हो ,
आज याद मैरी की आती है
जिसने प्रभु जीसस को जन्म दिया ,
धन्य है वो माँ वो पत्नी
कितने कष्टों को सह कर उफ़ तक न किया I
विवाह कर जोसफ ने मैरी का हर –पल
भरपूर ध्यान रखा था ,
दर –दर भटके गर्भावस्था में
रहने को न जब उनको स्थान मिला,
अस्तबल में शरण लिया था
तब नन्हा अंकुर धरती पर खिला ,
घुटनों के बल प्रणाम कर
सबने ईसा को मसीह को स्वीकार किया I
जिस तरह मैरी ने इतनी मुश्किलों को सहकर
प्रभु को जन्म दिया ,
हर स्त्री में है वो शक्ति
जो सम्मान करे मानो उसने पहचान लिया ,
इसलिए स्त्री को कमजोर न समझो
हर स्त्री में शक्ति समाहित है,
समझ जाओ वादे कर यदि तुम छलोगे
इसमें तुम्हारा ही अहित है I
नारी रूप ईश्वर का
अवहेलना नहीं तुम इनका नित सम्मान करो,
पिया संग अनुगामिनी बन
जीवन को सुरभित कर खुशबू भर देती ,
अनुपम प्रेम लुटाकर सब पर वो तो
ममता की बारिश कर देती ,
माँ बनकर हर दुख हर लेती
सारे और खुशियों से दामन भर देती I
जब साथ निभाना है
उम्र भर तो न कोई शिकवा न ही कोई गिला है ,
बटोर लो उन सभी खुशियों को
जो सबकी खुशियों का ध्यान है रखती ,
वो सभी वादे वो सभी कसमें
जो साथ खाई थी उनका तुम भी मान रखो,
न देंगे दगा कभी
इसलिए दिल से कहते
हम पर पूरा तुम विश्वास रखो।
