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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

नारी सम्मान

नारी सम्मान

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कहते हो शिकवा कोई नहीं 

फिर नाराज क्यों हो गए हमसफ़र ,

हमें छोड़कर यूँ मझधार में 

तुमने दावतें तो बहुत ही उड़ाई थी ,

उम्र भर साथ निभाने के लिए 

कसमें भी तुमने साथ हमारे खाई थी I 


उन सभी कसमों को क्यों तुम भूल बैठे हो 

क्या खता हुई हमसे ,

स्त्री का धर्म याद दिलाते हो 

अपना धर्म जाने क्यों भूल जाते हो ,

आज याद मैरी की आती है 

जिसने प्रभु जीसस को जन्म दिया ,

धन्य है वो माँ वो पत्नी

कितने कष्टों को सह कर उफ़ तक न किया I 


विवाह कर जोसफ ने मैरी का हर –पल  

भरपूर ध्यान रखा था ,

दर –दर भटके गर्भावस्था में 

रहने को न जब उनको स्थान मिला,

अस्तबल में शरण लिया था 

तब नन्हा अंकुर धरती पर खिला ,

घुटनों के बल प्रणाम कर 

सबने ईसा को मसीह को स्वीकार किया I 


जिस तरह मैरी ने इतनी मुश्किलों को सहकर

 प्रभु को जन्म दिया ,

हर स्त्री में है वो शक्ति 

जो सम्मान करे मानो उसने पहचान लिया ,

इसलिए स्त्री को कमजोर न समझो 

हर स्त्री में शक्ति समाहित है,

समझ जाओ वादे कर यदि तुम छलोगे

 इसमें तुम्हारा ही अहित है I 


नारी रूप ईश्वर का 

अवहेलना नहीं तुम इनका नित सम्मान करो,

पिया संग अनुगामिनी बन 

जीवन को सुरभित कर खुशबू भर देती ,

अनुपम प्रेम लुटाकर सब पर वो तो

 ममता की बारिश कर देती ,

माँ बनकर हर दुख हर लेती 

सारे और खुशियों से दामन भर देती I  


जब साथ निभाना है 

उम्र भर तो न कोई शिकवा न ही कोई गिला है ,

बटोर लो उन सभी खुशियों को 

जो सबकी खुशियों का ध्यान है रखती ,

वो सभी वादे वो सभी कसमें 

जो साथ खाई थी उनका तुम भी मान रखो,

न देंगे दगा कभी 

इसलिए दिल से कहते 

हम पर पूरा तुम विश्वास रखो।


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