Palash Jaiswal
Drama
नारी तू नारायणी
तू ही काली कल्याणी
तू नही अबला है
तुझमे अपार सबला है ।
नारायणी
फरिश्तों ने जिसका सजदा किया होगा.... वो कोई पीर रहा होगा. फरिश्तों ने जिसका सजदा किया होगा.... वो कोई पीर रहा होगा.
इन हालातों में मैने जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखा। इन हालातों में मैने जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखा।
आनन्द स्वस्फूर्त है दुःख बाहर से आता है, आनन्द भीतर से आता है तू ही तू। आनन्द स्वस्फूर्त है दुःख बाहर से आता है, आनन्द भीतर से आता है तू ही तू।
जताकर प्यार आँखों से, झुका लेती हो इन पलकों को, मोहब्बत का ये कैसा, सितम अदा करती हो त जताकर प्यार आँखों से, झुका लेती हो इन पलकों को, मोहब्बत का ये कैसा, सितम अदा ...
जिसने सिर्फ सहना सीखा, आवाज़ उठाना भूल गया। जिसने सिर्फ सहना सीखा, आवाज़ उठाना भूल गया।
इस संतोष के साथ कि नहीं देखा उस दबे कुचले लोथड़े को। इस संतोष के साथ कि नहीं देखा उस दबे कुचले लोथड़े को।
उनके दिल में अगर चिराग़ जला पाऊँ तो भी बहुत है! उनके दिल में अगर चिराग़ जला पाऊँ तो भी बहुत है!
एक कहानी का अंत हुआ एक नई कहानी शुरू हुई, एक कहानी का अंत हुआ एक नई कहानी शुरू हुई,
पर उम्मीद पूरी रखती हूं काश ये दुनिया मुझे समझ पाती। पर उम्मीद पूरी रखती हूं काश ये दुनिया मुझे समझ पाती।
रंग बदलती दुनिया देखकर, गिरगिट भी नाराज है। रंग बदलती दुनिया देखकर, गिरगिट भी नाराज है।
बिखरेगी तू क्षणों में, छाँव जो आने वाली है, बिखरेगी तू क्षणों में, छाँव जो आने वाली है,
बन्धु और बन्धुता जग में सबसे प्यारा और न्यारा है। बन्धु और बन्धुता जग में सबसे प्यारा और न्यारा है।
न अग्नि की तपन ये है न वायु का ये वेग है न अग्नि की तपन ये है न वायु का ये वेग है
कोसूँ खुद को, मृत्यु को तरसूँ पर प्राण नहीं लेता महाकाल। कोसूँ खुद को, मृत्यु को तरसूँ पर प्राण नहीं लेता महाकाल।
और जी लिया करते हैं उन झूलों की प्यारी यादों में। और जी लिया करते हैं उन झूलों की प्यारी यादों में।
प्रेम का इजहार है, हरसूँ हर बार है, हाथों में गुलाब है। प्रेम का इजहार है, हरसूँ हर बार है, हाथों में गुलाब है।
पीपल की एक एक शाख सा हर घर रहा इसी आस पर पीपल की एक एक शाख सा हर घर रहा इसी आस पर
काली स्याह रात में जब खिलते हैं रात के फूल। काली स्याह रात में जब खिलते हैं रात के फूल।
क्योंकि इस बार जो मैं सोई फिर कभी न उठ पाऊँगी। क्योंकि इस बार जो मैं सोई फिर कभी न उठ पाऊँगी।
कहने को तो दो घर है पर बेटियों का कोई घर नहीं होता ! कोई घर नहीं होता ! कहने को तो दो घर है पर बेटियों का कोई घर नहीं होता ! कोई घर नहीं होता !