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रंजना उपाध्याय

Abstract

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रंजना उपाध्याय

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मुक्तक

मुक्तक

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मैं अपने खुद की राह का चुनाव करती हूं

तुम अपने आप चलते हो मैं अपने आप चलती हूँ।


श्वान का काम है भौंकना ऐरावत का काम है चलना

मैं अपना काम करती हूं तुम अपना काम करते हो।


मेरे नेह की कहानी मेरी नींद के अधूरे ख्वाब जैसे हैं

नेह का मतलब रिश्ते,नाते ,बंधन सब एक जैसे हैं।


हमने भी सबकी तरह दिल मे एक ख्वाब सजाया है

अपनो के दिल मे रहकर घर आँगन को महकाया है।


कृपा, दया, अनुग्रह कृपालुता का अंदाज अच्छा है

मेरे शब्दों की चर्चा इस कदर जमाने भर में होती है।


तुम्हारी की हुई हर कोशिश मेरे लिए बेअसर होती हैं

ख्वाब तुमने मेरा तोड़ा दुबारा जुड़ नही सकती।


तुम्हारी नेह के खातिर जमाना छोड़ नही सकती

भले षडयंत्र से अपने मुझे पाने की कोशिश कर डालो


मैं भी सृष्टि की बीज हूँ मुझे अपने जैसा ही समझ लो।


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