STORYMIRROR

Onkar Awachare

Abstract

3  

Onkar Awachare

Abstract

मुकाम तक पहुंचने के लिए

मुकाम तक पहुंचने के लिए

1 min
316

किसी मुकाम तक पहुंचने के लिए

वक्त को गुजरते देखना होगा

राह की करवटें बदलते देखना होगा

सूरज की छांव में चलना होगा

चांद की गर्मी में तपना होगा


किसी मुकाम तक पहुंचने के लिए

दूरी का नहीं मुकाम का पता करना होगा

रुकें हो फिर भी चलना होगा

भागना नहीं बिना रुके चलना होगा


किसी मुकाम तक पहुंचने के लिए

तुम्हें चलना होगा

तुम्हें ही चलना होगा

तुम्हें ही आगे बढ़ना होगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract