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Garima Mishra

Abstract

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Garima Mishra

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मतलबी दुनिया

मतलबी दुनिया

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हां, माना कि है दुनिया मतलबी

पर क्या हम उनमें से एक नहीं


कहते थे हम भी कभी

किसी के बिना मैं जी नहीं सकती

मगर उनके जाने के बाद ही

शायद खुशियों ने दस्तक दी


आज मोहब्बत नहीं है किसी से

मगर उनमें से कोई इतने बुरे नहीं थे

कि नफरत के हकदार बने


हम भी मतलबी

दुनिया भी मतलबी

फिर शिकवा करें किस बात की।


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