मृदा से सने हुए पग को...
मृदा से सने हुए पग को...
मृदा मे सने हुए पग को, मैंने खेतों मे देखा है।
शोषित कपोल पे मुस्कानों ने, खीची अदभुत रेखा है ।।
मैंने देखा है, हृदयों को पुलकित होते उन खलिहानों में।
देखा है मन..!! जो नाच रहे थे, तरू के संग उन तानों में।।
शहरों के दौड़ से दूर कहीं, आज मैंने खुशियाँ देखी है
कौतूहल समेटे आँखो मे , अहलादित् कलियाँ देखी है।।...
