STORYMIRROR

Kapil Papneja

Abstract

4  

Kapil Papneja

Abstract

मोहब्बत हुई है

मोहब्बत हुई है

1 min
387

नींदों से जग कर जो तुम गुनगुनाओ

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है

सजकर संवर कर यूँ ही मुस्कुराओ

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है


महफिल हजारों की पर तुम हो तन्हा

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है

हो सदियों बराबर जुदाई का लम्हा

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है


हृदय की शिराओं में अद्भुत स्पंदन

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है

बाँहो में तकिया हो उसका आलिंगन 

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है


ख़्वाबो में देखो उसी का ही चेहरा

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है

छिछला सा चिंतन लगे तुमको गहरा

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है


दुनियावी मानक लगें जब आडम्बर 

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है

बगावत का शोला दहकता हो अंदर

तो समझो के तुमको मोहब्बत हुई है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract