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Pradeep Sharma

Abstract

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Pradeep Sharma

Abstract

मोड़

मोड़

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जो छोड़ आए थे आज फिर उस मोड़ से जाते हैं

भूल गए जो यादें उन यादों को आज चुरा लाते हैं


कुछ कदमों को पीछे रखना अच्छा होता है जानिब

चलो उन कदमों के निशानों को पक्के कर लाते हैं।


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