Vijay Kumar parashar "साखी"
Abstract
जो मज़ा इंतज़ार में है
साखी वो इकरार में नहीं है।
तुम मुझसे दूर हो फिर भी
मेरा प्यार कम नहीं है।
मिलेंगे हम जरूर मिलेंगे
तन से नहीं मन से मिलेंगे।
जो मिलन मन का है वो
खुदा से मिलने से कम नहीं है।
"गोवंश पर अत्...
"चमत्कार"
"दौर मुफ़लिसी ...
"दुआ-बद्दुआ,
"आंटा-सांटा"
"सिंदूर"
"बरसात"
"शांत और स्थि...
"दोगले इंसान"
एक गुरुत्वाकर्षण बल जो रहे कार्यरत दो ग्रहों के मध्य सतत। एक गुरुत्वाकर्षण बल जो रहे कार्यरत दो ग्रहों के मध्य सतत।
कभी मेरी रूह कांपती है, ये सोच कर कि, मरने के बाद मै कहाँ रहूंगा ? कभी मेरी रूह कांपती है, ये सोच कर कि, मरने के बाद मै कहाँ रहूंगा ?
रिश्तों में आजकल मैंने तल्खी देखी है फ़िजूल की रिश्तों में जबर्दस्ती देखी है! रिश्तों में आजकल मैंने तल्खी देखी है फ़िजूल की रिश्तों में जबर्दस्ती देखी है!
साथ सफर आरंभ किया , क्यूंकि तब वहां प्यार और सम्मान था। साथ सफर आरंभ किया , क्यूंकि तब वहां प्यार और सम्मान था।
वोकल से लोकल का भाव बढ़ गया हमें अपनी जिम्मेदारी बता गया। वोकल से लोकल का भाव बढ़ गया हमें अपनी जिम्मेदारी बता गया।
कुछ नन्ही सी शायरी.. मेरे झोले में मिलेंगीं। कुछ नन्ही सी शायरी.. मेरे झोले में मिलेंगीं।
साझेदारी की ओट में छिपता मनुष्य, अपने ही बुने जाल में फंसता जा रहा है साझेदारी की ओट में छिपता मनुष्य, अपने ही बुने जाल में फंसता जा रहा है
तेरे बिना अस्तित्व अपना नहीं सोच पाती हूँ, कि तुझको ही बुलाती हूँ। तेरे बिना अस्तित्व अपना नहीं सोच पाती हूँ, कि तुझको ही बुलाती हूँ।
आँखें तरेर कर गया , वह मुंह फेर कर गया , यूं जिंदगी के शेर को , बेटा वह ढेर कर गया । आँखें तरेर कर गया , वह मुंह फेर कर गया , यूं जिंदगी के शेर को , बेटा वह ढेर क...
क्योंकि बात जुबां पर आ नहीं सकती इसलिए लिखना जरूरी है... क्योंकि बात जुबां पर आ नहीं सकती इसलिए लिखना जरूरी है...
वो एक पन्ना ज़िंदगी का तेरे नाम जो है फाड़ना चाहती हूँ! वो एक पन्ना ज़िंदगी का तेरे नाम जो है फाड़ना चाहती हूँ!
सच कहता हूँ उस वक्त प्रिय तुम बहुत याद आती हो । सच कहता हूँ उस वक्त प्रिय तुम बहुत याद आती हो ।
करती है सब कुछ मुआयना यह आंखें हैं मन का आईना. करती है सब कुछ मुआयना यह आंखें हैं मन का आईना.
एक कुंदन भी कभी लोहा हो जाता है संगत से तो हंस भी कौआ हो जाता है! एक कुंदन भी कभी लोहा हो जाता है संगत से तो हंस भी कौआ हो जाता है!
राह लंबी है घुप अंधेरा है उनकी आंखों में ख्वाब मेरा है। राह लंबी है घुप अंधेरा है उनकी आंखों में ख्वाब मेरा है।
कही अनकही बातों को भूलाकर अब मानवता का श्रृंगार हो, कही अनकही बातों को भूलाकर अब मानवता का श्रृंगार हो,
क्योंकि जैसे वो मेरे लिए, और मैं उसके लिए, पहले थी वैसे अब, वो मेरे लिए और मैं उसके लि क्योंकि जैसे वो मेरे लिए, और मैं उसके लिए, पहले थी वैसे अब, वो मेरे लिए और मै...
हे वर्ष पुराने! जाओ तुम! यह विदा गीत हम गाते हैं.. हे वर्ष पुराने! जाओ तुम! यह विदा गीत हम गाते हैं..
कोई हार गया कोई जीत गया ये साल भी आख़िर बीत गया! कोई हार गया कोई जीत गया ये साल भी आख़िर बीत गया!
एक मंजिल की तलाश में कुछ दूर चला आया हूँ मैं! एक मंजिल की तलाश में कुछ दूर चला आया हूँ मैं!