STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

मिलन

मिलन

1 min
277

जो मज़ा इंतज़ार में है

साखी वो इकरार में नहीं है।


तुम मुझसे दूर हो फिर भी

मेरा प्यार कम नहीं है।


मिलेंगे हम जरूर मिलेंगे

तन से नहीं मन से मिलेंगे।


जो मिलन मन का है वो

खुदा से मिलने से कम नहीं है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract