महफिलें थी
महफिलें थी
सुनाई जहां महफिले थी बतानी।
निभाई वहां खैरियत थी बतानी।
अधूरी कहानी पुरानी जहां थी,
कहाँ फिर हुई वो कहानी बतानी।
हुई फिर रवानी सुहानी सयानी,
खुलें जो लिफ़ाफ़े कहानी बतानी।
नहीं फिर किसी से पहचान छुपानी,
खिली हैं ज़िन्दगी हमारी बतानी।
