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Meena Mallavarapu

Inspirational

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Meena Mallavarapu

Inspirational

मेरी उड़ान

मेरी उड़ान

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उड़ान मेरी रोकना बस में है किसके

मैं पंछी उन्मुक्त ,उड़ान मेरी रग रग में

फ़ितरत मेरी बदलना बस में है किसके

अंकुरित हुई वह उड़ान जो मेरे वजूद में

क्यों करूं उसे व्यथित,क्यों होने दूं उदास

क्यों करने दूं उस पर कब्जा औरों को-

उड़ूं और उड़ने दूं ,पूरी करूं सबकी आस

ख़ुशी दूं ख़ुद को, औरों को,अपनों को

कौन न चाहे अनुभूति स्वछन्द उड़ान की

कौन न चाहे उड़ना बादलों के पार

कौन न चाहे पहुंच नीले आसमान की

कौन न चाहे उड़ना हार के उस पार

बनूं न मैं कभी किसी की राह का रोड़ा

है उड़ान ही मेरे लिए स्पन्दन भी,सांस भी

ज़िंदगी ने सब को इस एहसास से जोड़ा

मेरी उड़ान हो हौसलों भरी-आज़ाद भी

जूझूं मैं हर बंधन से -संतुलन न खोऊं

उड़ान ने सिखाया संतुलन का मोल

मन की बातें अपनी कैसे समझाऊं

उड़ान की परिभाषा का क्या है घोल!



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