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Bindiya rani Thakur

Abstract

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Bindiya rani Thakur

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मेरे लिए मैं

मेरे लिए मैं

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    मुझको थोड़ा सा मैं ही रहने दो 

    खुद के लिए ज़रा सा जी लेने दो 

    सबके लिए तो हूँ मैं सदा से ही 

    मेरे लिए भी मुझको रहने दो

    नहीं चाहिए पंख सुनहरे 

    ना ही खुला आसमान 

    अरमां बस इतना ही 

    हाँ! चैन की सांस 

    मुझे भी लेने दो

   सांस लेने दो

    बस।।।


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