Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Shirish Pathak

Romance


4  

Shirish Pathak

Romance


मेरे ख्वाब

मेरे ख्वाब

2 mins 408 2 mins 408

अचानक निकल पड़े आज हम

एक अनजान सफ़र पर 

बिना कुछ भी सोचे बिना कुछ भी जाने

दूर चले जाना इस शहर के शोर से दूर


तुम्हारे चेहरे की ख़ुशी को

देखना अच्छा लगता है

नदी की लहरों को गिन लेना जब तुम

उसमें एक कंकड़ फेक देती हो

तुम खुश हो जाती हो गाँव को देख के

तुम्हारी चाहत किसी चाय की गुमटी में

चाय पी लेने से ही पूरी हो जाती है

 

सोचता हूँ कोई इतना आसान कैसे

हो सकता है आजकल के इस जीवन में

जो ज़माने की सभी कठिनाइयों को

बस अपनी मुस्कराहट से दूर कर देती है

जब भी तुम कहती हो चलो न

किसी एकांत सी जगह पे चलते हैम

ऐसा लगता है जैसे किसी ने मेरे मन की

सभी बातों को सुन लिया हो

 

तुम मेरे लिए खुद को बदल लेना नहीं ये सोचकर

कहीं मुझको तुम्हारी कोई बात बुरी न लग जाए

या कहीं कुछ और बात को अपने दिल में छुपाकर

मेरे साथ खुद का साथ अलग न कर लेना

 

जानती हो तुम मेरा डर ये नहीं है

कि शायद हम एक न हो पाए

मेरा डर इस बात से होता है

कहीं मैं तुमको खो न दूँ

तुम ये सोच लेती होगी मैं तुम्हारी

हर बात को सही मान लेता हूँ

ऐसा नहीं है तुम कुछ गलत तो

नहीं कहती होगी

लेकिन जानती हो न मैं चाह के भी

तुमसे जुदा नहीं होना चाहता

अपनी किसी गलती के कारण

 

तुम ये न सोच लेना ये मेरा

पागलपन है तुम्हारे लिए

अक्सर कह देता हूँ तुमसे

मेरी कल्पनाओं से बढ़ कर हो तुम

मेरे ख्वाबों को पूरा सिर्फ करती हो तुम।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Shirish Pathak

Similar hindi poem from Romance