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बोधन राम निषाद राज

Abstract

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बोधन राम निषाद राज

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मेघ आये

मेघ आये

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बादल  आये झूम के, काले हैं घनघोर

देख घटा को प्रेम से, नाचे ये मन मोर।


आँधी अरु तूफान भी, साथ चले हैं आज

उमड़ घुमड़ आकाश में, बादल करते राज।


काली घटा दिखे यहाँ, मन में उठी उमंग

मानसून आने  लगा, देखो बादल संग।


बरसेगा पानी  यहाँ, होगी  पूरी आस

नदी ताल औ जीव की, मिट जायेगी प्यास।


हरियाली अब खेत में, छाये छटा बहार

आओ मिल खेले सभी, बरसे खूब फुहार।


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