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Ankita Sharma

Action Fantasy

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Ankita Sharma

Action Fantasy

मैंने देखा है

मैंने देखा है

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रुक के भी चलना सिखा है

उन नजरों से बचना सिखा हैं

हालात कैसे भी हो मेरे

मैंने खुद ही संभलना सिखा है

जमाने की राह में

उन झूठे रिवाजों में

पर्दे के पीछे रह के भी

खुद ही निकलना सिखा है

अपनी सोच से मैंने

दुनिया को बदलना सिखा है

आजादी तो मिल गई कबसे

फिर भी है रीतियाँ जबसे

और इन रीतियों के बीच

मैंने आजादी को ढूंढते देखा है

नन्हे हाथों में मैंने

चूड़ियों को बंधते देखा है

इस उम्र में मैंने

जिम्मेदारियों को बढ़ते देखा है

मुस्कुराहटों के पीछे मैंने

गम को सिमटते देखा है

बड़ी आँखों मैं मैंने जब

ख़्वाबों को टूटते देखा है

ओर उन्हीं ख़्वाबों के लिये 

मैंने रातों को जगते देखा है

फिर उन्हीं आंखों में मैंने

उम्मीदों को ढूंढते देखा है

ओर उम्मीदों की तलाश में मैंने 

रास्तों को बनते देखा है


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