मासूमियत और वफ़ादारी
मासूमियत और वफ़ादारी
मासूमियत,
और वफ़ादारी
दोनों साथ -साथ चलते हैं।
जिंदगी के,
हर सफर को,
दोनों साथ -साथ तय करते हैं।
मासूमियत,
और वफ़ादारी
दोनों साथ- साथ चलते हैं।
विश्वास ही है,
जो साथ -साथ चलते हैं।
उसी के दम पर,
आगे -आगे बढ़ते हैं।
तब...!
डर कैसा ..?
जिंदगी की,
तमाम मुश्किलें
आसानी से हल करते हैं।
मासूमियत ,
और वफ़ादारी
दोनों साथ -साथ चलते हैं।
धोखे से नहीं,
जीतता इंसान।
अपनी,
चालाकियों से,
हार जाता है।
बड़ी -बड़ी शक्तियाँ,
जहां दफ़न हो गई
भू के गर्भ में,
सिर्फ
मासूमियत
और वफ़ादारी है।
जो करामात,
कर जाती है।
रास्ते कितने,
भी मुश्किल हो।
चलते -चलते,
मंज़िलें पा जाती हैं।
मासूमियत ,
और वफ़ादारी।
जिंदगी को,
जिंदगी बना जाती है।
बड़ी-बड़ी मंज़िलें ,
पलक झपकते ही ,
पल में ही पा जाती है।।
