STORYMIRROR

Deepti Agrawal

Inspirational Others

3  

Deepti Agrawal

Inspirational Others

मासूम जान

मासूम जान

1 min
412

मासूम जान ही तो थे

जो लड़ रहे थे सारे जहां से

ना तलवार थी ना ही ढाल

सितमगरों की सह कर मार

वो अपनी जिद पर अड़े थे

सत्याग्रह करना हो 

चाहे करना हो दांडी मार्च

वो अपने निश्चय पर अडिग थे

अनशन कर कइयों बार

झुका दिया अंग्रेजों का वार

करा देश को तब आजाद

उस नन्हे मासूम जान को प्रणाम।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational