माँ
माँ
याद बुहत आती है माँ
समय की गर्दिशे मुझे बुहत सताती माँ
तेरी लोरी, वो तेरे आँचल तले चैन से सोती मैं याद आता वो लम्हा माँ
तेरे साये में बीता पल याद आता माँ
तेरे बाँधे मन्नत के धागों,दुआ का असर है माँ
जीवन के हर तकलीफ से बचकर निकल आती हूं माँ
उम्र भर तेरी खिदमत का इजहार करती हूं माँ
तेरी खुशी में अपनी जन्नत समझती हूं माँ
तू ही मेरी कायनात तू ही मेरा सब कुछ है माँ
वो तेरा माथे पर प्यार से चूमना मुझे याद आता है माँ
जब रोती तो भी परेशान रात भर जागकर तुम्हारा ये कहना कि
कुछ नहीं सब ठीक हो जाएगा याद आता है माँ
माँ मेरे सफल होने पर तेरा दौड़ कर खुशी से ग
ले लगाना याद आता है माँ
कभी दोस्त बनकर हँसी मज़ाक कर मेरी
खामोशी को समझना याद आता है माँ
कभी गुस्से में डाँट कर चुपके से पुकारना
फिर सर पे अपना हाथ फेरकर मुझे सहलाना याद आता है माँ
बाँध देती गेसुओं में अपनी परेशानी को फिर
भी सभी के सामने अपने चेहरे पर हँसी गुलजार रखती
एक शिकन नहीं होती उनके लबों पर खुद से भी ज्यादा
अपने परिवार का ध्यान रखना बुहत याद आता है माँ
लुटा देती अपने अरमानो को अपने बच्चों की परवरिश में,
उन्हीं के सपनों में अपना सारा जहाँ रखना
अपने पसीने से सींच देती अपने घर को अपने दर्द को खुद में समेटे रखना
सर दर्द हो या बुखार वो हर पल बच्चों के लिए हाजिर रहती
अपना कर्तव्य बखूबी निभाना वो अक्सर याद आता है माँ
माँ दुनिया की भीड़ में फिर से अपना ममता का साया दे दो माँ
तुम्हारा स्नेह भरा प्रेम याद आता है माँ।
