Sujata Kale
Abstract
वृक्ष की लेखनी बनाऊँ,
और आकाश का कागज,
समुद्र की स्याही बनाऊँ,
और मन का अधिरथ,
फिरू भी माँ...
तुम्हारी महिमा
मैं लिख न पाऊँ...।
मेरु सा मथ दूं मैं मन को,
कल्पवृक्ष और धेनु मैं पाऊँ
कृष्ण से बाँसुरी मंगवाऊँ,
फिर भी माँ,
तुम सा मैं,
आँचल ना पाऊँ....।
देख तेरे शहर ...
नायाब पत्थर ...
तुममें और चाँ...
नीलमोहर
अमलतास
गुलमोहर
सुन ऐ जिंदगी ...
तुम न आना भूल...
अब के पतझड़ म...
इन्सान देखो क...
घर में छुपा माँ का मातृत्व और पिता का आशीष, साक्षात होता है। घर में छुपा माँ का मातृत्व और पिता का आशीष, साक्षात होता है।
दिवस पावन मधुर बेला प्रभु श्रीराम आए हैं। मनाओ हर तरफ उत्सव प्रभु श्रीराम आए हैं। दिवस पावन मधुर बेला प्रभु श्रीराम आए हैं। मनाओ हर तरफ उत्सव प्रभु श्रीराम आए है...
भ्रातृ-प्रेम होता है कैसा यह रामकथा बतलाती है धर्म हेतु पुत्र मोह करें न हमें ऐसा पाठ भ्रातृ-प्रेम होता है कैसा यह रामकथा बतलाती है धर्म हेतु पुत्र मोह करें न हमें...
रामचरित कंठस्त उन्हें है पल पल प्रभु की याद जिन्हें है रामचरित कंठस्त उन्हें है पल पल प्रभु की याद जिन्हें है
इंसान मुक्त हो जाता है एक दिन साॅंसों के बंधन से। इंसान मुक्त हो जाता है एक दिन साॅंसों के बंधन से।
अक्सर मन में उलझी हुई बातों को समेट लेती हूं इसके अंदर अक्सर मन में उलझी हुई बातों को समेट लेती हूं इसके अंदर
जहाँ मिल ना पाए कोई अपना और इस पल को भी हम लुभा नहीं पाए। जहाँ मिल ना पाए कोई अपना और इस पल को भी हम लुभा नहीं पाए।
तिरंगे से ही लिपट मातृभूमि पे अपनी दोनों आँखें मूंदे। तिरंगे से ही लिपट मातृभूमि पे अपनी दोनों आँखें मूंदे।
कि तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहे न रहे। कि तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहे न रहे।
बचपन से जवानी फिर बुढ़ापे तक, पैरों पे जकड़ी रिवाजों की जंज़ीरें, बचपन से जवानी फिर बुढ़ापे तक, पैरों पे जकड़ी रिवाजों की जंज़ीरें,
इसलिए इसलिए नारी सबसे सरल शील और प्यारी उस विधाता की कृति है । इसलिए इसलिए नारी सबसे सरल शील और प्यारी उस विधाता की कृति है ।
बचपन में जो मेरे लिए, दुनिया से लड़ लेती थी। बचपन में जो मेरे लिए, दुनिया से लड़ लेती थी।
जज़्बातों की स्याही में शब्दों का प्रवाह है , मन के अंदर , वही पानी के बुलबुले से शब्द। जज़्बातों की स्याही में शब्दों का प्रवाह है , मन के अंदर , वही पानी के बुलबुले...
महाकवि तुलसी के पुज्य राम का विश्वास है। ये तिरंगा वीर अर्जुन और ये हनुमान है। महाकवि तुलसी के पुज्य राम का विश्वास है। ये तिरंगा वीर अर्जुन और ये हनुमान ह...
नाथ ये जग के त्रिलोकनाथ हैं प्रेम, समर्पण, सत्य सनात हैं नाथ ये जग के त्रिलोकनाथ हैं प्रेम, समर्पण, सत्य सनात हैं
हम देखते सहते सब कुछ यहां पर फिर भी मैंने शोकसागर में डूबी आंखों में आशा को हंसते देखा हम देखते सहते सब कुछ यहां पर फिर भी मैंने शोकसागर में डूबी आंखों में आशा को ह...
कभी लड़ाई कभी खिंचाई, कभी हँसी ठिठोली थी कभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली थी। कभी लड़ाई कभी खिंचाई, कभी हँसी ठिठोली थी कभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली...
गूँगे-बहरे,अंधे बने रहो तुम और बोलो जय श्री राम, बोलो जय श्री राम….. गूँगे-बहरे,अंधे बने रहो तुम और बोलो जय श्री राम, बोलो जय श्री राम…..
हो सुरक्षित हो देश अपना, चलते रहे ये जोश लिए। हो सुरक्षित हो देश अपना, चलते रहे ये जोश लिए।
वक्त जीवन पहचान परिधान है वक्त व्यवहार वक्त आचार वक्त जीवन पहचान परिधान है वक्त व्यवहार वक्त आचार