माँ
माँ
माँ अनमोल रिस्ता
एक अनमोल खजाना
माँ बनती जिस लम्हे
उसका नहीं कोई सानी
पाती वरदान ईश्वर का
जन्म के रूप में जिसको
सहती सभी वो दर्द, पीड़ा
जन्म देते हुए उसको
फिर भी खुशी होती
सुख मनाती
पाती असीम सुख
अपने शिशु को पाकर
जिसे पाला अपनी कोख में
नौ महीने रखकर
करती लालन पालन
अति उत्साह से उसका
सहती सभी दुख
नहीं करती शिकायत
अपने आप से भी कभी कोई
देती प्यार अपने जाये को
जैसे करती उपकार अपने पर
यही माँ का बड़ा उपहार,
जताती नहीं कोई अपना
उपकार बच्चों पर
यही माँ का बड़ा उपहार
जताती नहीं कोई अपना
उपकार बच्चों पर।
