माँ का आँचल
माँ का आँचल
मांँ भगवान की सबसे सुंदर रचना है,
भगवान ने अपने रूप में हमारे पास भेजा है।
मांँ का दुलार, मांँ का आँचल, मांँ का सिंगार,
ही तो हमारा संसार है।
जैसे मांँ का सिंदूर उसके अस्तित्व की पहचान है,
माँ की बिन्दी सूरज और चांद का नूर है।
उसका कुंडल जैसे कोई कमंडल हो साध्वी का,
नाक की नथ एक सितारे सी चमकती है।
माँ के गले का हार हमारी बाहों जैसा,
मांँ का बाजूबंद उसकी ताकत का अवलोकन है।
माँ का कमरबंद उसके धैर्य को दर्शाता है,
मांँ की खनकती चूड़ियांँ उसके होने का एहसास है।
मांँ की पायल की झंकार, उसकी आहट है,
जिसमें सारा ब्रह्मांड समाया है।
