STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Abstract Children

3  

AVINASH KUMAR

Abstract Children

मां जिसका नाम है

मां जिसका नाम है

1 min
194

ऐसा कौन सा दिन है जो माँ बिन पूरा हो हर दिन माँ का ही है पर फिर भी सब कहते हैं तो आज माँ के लिए माँ को प्रणाम करते हुए एक दोहावली प्रस्तुत है।


रिश्ता खूब पवित्र है जो, मां उसका है नाम।

इंसान नहीं फरिश्ता वो, मां जिसका है नाम।।


माता चरणों में बसा, देवों का ही धाम।

जीवन मधुर करती जो, मां जिसका है नाम।।


जीवन जिसकी देन ये, पूजा करो निष्काम।

मीठी-मीठी सरस ये, मां जिसका है नाम।।


गर खुद को कराना हो, तीरथ चारों धाम।

थाम लो उन चरणों को, मां जिसका है नाम ।।


जीवन नश्वर रहा सदा, मौत ही है अंजाम ।।

आनंद उन्हीं चरण मिला, मां जिसका है नाम।


कुमार अविनाश झुकाता शीश सभी माताओं को प्रणाम है

मां जिसका नाम है, मां जिसका नाम है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract