STORYMIRROR

चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज

Inspirational

4  

चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज

Inspirational

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली

2 mins
341


सूरज को पकड़ने चली 

हर मुश्किलों को पार करके , 

आज उन्मुक्त गगन में उड़ने मैं चली।


सबकी मुझसे अनंत इच्छाएंँ हैं , 

एकाग्र चित्त होकर , 

सबके सपनों को साकार करने मैं चली।


सागर में ऊंँची लहरें उठती - गिरती हैं

गिरने के डर से कभी मैं रुकती नहीं , 

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली।


मांँ कहती है दुलार से तुम मेरी शुचिता ! हो , 

तुममें आंतरिक शक्ति विराजमान है , 

मांँ का आशीर्वाद लेकर आज घर से मैं निकली हूंँ, 

आईआईटी की तैयारी करने मैं चली।


हॉस्टल के एक छोटे से कमरे में रहती हूंँ , 

याद अपनों की आती है रो लेती हूंँ , 

उसी क्षण पिता की मेहनत आंँखों के सामने आ जाती है, 

जिन्होंने एक - एक रुपया जोड़कर , शिक्षण शुल्क को इकट्ठा किया, 

महंँगी शिक्षा को ग्रहण करने मैं चली।


अर्थ के अभाव में प्रतिभा दब - सी जाती है, 

चुनौतियों का सामना करने मैं चली।


मोह त्याग कर मुझे अध्ययन करना है , 

मांँ का दिया अलसी का लड्डू व मठरी जब मैं खाने के लिए निकालती हूंँ , 

मुझे जिंदगी मीठी - नमकीन - सी लगती है, 

जितना मैं मेहनत करूंँगी फल उतना ही मीठा होगा! 

खट्टे - मीठे अनुभवों का स्वाद लेने मैं चली।


मांँ ! मेरी खाने — पीने की  फ़िक़्र मत करना , 

दिन – रात सेहत का ध्यान रखती हूंँ, 

भौतिक का चूर्ण खाती हूंँ , रसायन का रस पीती हूंँ, 

मनोरंजन का भी ध्यान रखती हूंँ , 

गणित को नचा नचा कर हंँस लेती हूंँ , 

मैं यहांँ बहुत अच्छी हूंँ ! 

' स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है '

 कथन अरस्तु का है अनुकरण करने मैं चली।


मैं यहांँ क़िस्मत को बदलने आयीं हूंँ , 

विश्व में भारत मांँ का परचम लहराने आयीं हूंँ, 

स्वर्णिम इतिहास लिखने मैं चली।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational