STORYMIRROR

हमराही The stranger...

Abstract

3  

हमराही The stranger...

Abstract

लहजा...

लहजा...

1 min
122

लफ़्ज़ नही जनाब

मुझे लहजा चुभ जाता है

दिल का दर्द 

छुपाए से कहां छुपता है

प्यार की बातों का एतबार क्या करना

ये प्यार ही तो सब की 

आखों मे चुभता है!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from हमराही The stranger...

Similar hindi poem from Abstract