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Praveen Gola

Abstract

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Praveen Gola

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क्यूँ है ?

क्यूँ है ?

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इस साल का फाल्गुन मास ,

दर्द से भरा क्यूँ है ?

रँग - बिरंगी होली में ,

बेरँग सा क्यूँ है ?


क्यूँ हिंसा अपनी चरमसीमा पर ,

त्योहार के आने से पहले हो रही ,

क्यूँ धर्म के नाम पर ,

मानव की मति खो रही ?


क्यूँ लोग रंगों को छोड़ अब ,

लहू का रँग लगाने लगे ?

क्यूँ ये नेता आम जनता को लड़वा ,

अपनी दुकान चलाने लगे ।


होली का पर्व भाईचारे का प्रतीक है ,

इसमे किसी की ना हार ना जीत है ,

वर्ष में एक बार इसे दिल से मना लो ,

दर्द के नहीं सब खुशियों के गीत गा लो । ।



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